Tuesday, September 25, 2018

दौड़

दौड़

एक दस वर्षीय लड़का प्रतिदिन अपने पिता के साथ पास की पहाड़ी पर सैर करने जाता था। एक दिन लड़के ने कहा, “पिताजी चलिए आज हम दौड़ लगाते हैं, जो पहले चोटी पर लगी उस झंडी को छू लेगा वह दौड़ जीत जाएगा।”
पिताजी तैयार हो गए। दूरी अधिक थी, दोनों ने धीरे-धीरे दौड़ना आरंभ किया।
कुछ देर दौड़ने के बाद ही पिताजी अचानक रुक गए।
“क्या हुआ पापा, आप अचानक रुक क्यों गए, आपने अभी से हार मान ली क्या?”, लड़का मुस्कुराते हुए बोला।
“नहीं-नहीं, मेरे जूते में कुछ कंकड़ पड़ गए हैं, बस उन्ही को निकालने के लिए रुका हूँ”, पिताजी बोले।
लड़का बोला, “अरे, कंकड़ तो मेरे भी जूतों में पड़े हैं, लेकिन यदि मैं रुक गया तो दौड़ हार जाऊँगा…”, और यह कहता हुआ वह तेज़ी से आगे भागा।
पिताजी भी कंकड़ निकाल कर आगे बढे़, लड़का बहुत आगे निकल चुका था, पर अब उसे पाँव में दर्द का अनुभव हो रहा था, और उसकी गति भी घटती जा रही थी। धीरे-धीरे पिताजी भी उसके समीप आने लगे थे।
लड़के के पैरों में कष्ट देख पिताजी पीछे से चिल्लाए, “क्यों नहीं तुम भी अपने जूते में से कंकड़ निकाल लेते?”
“मेरे पास इसके लिए समय नहीं है !”, लड़का बोला और दौड़ता रहा। कुछ ही देर में पिताजी उससे आगे निकल गए।
चुभते कंकडों की कारण लड़के का कष्ट बहुत बढ़ चुका था और अब उससे चला भी नहीं जा रहा था। वह रुकते-रुकते चीखा, “पापा, अब मैं और नहीं दौड़ सकता।”
पिताजी जल्दी से दौड़कर वापस आए और अपने बेटे के जूते खोले, देखा तो पाँव से खून निकल रहा था। वे उसे झटपट घर ले गए और मरहम-पट्टी की।
जब दर्द कुछ कम हो गया तो उन्होंने ने समझाया,” बेटे, मैंने आपसे कहा था न कि पहले अपने कंकडों को निकाल लो और फिर दौड़ो।”
“मैंने सोचा यदि मैं रुका तो दौड़ हार जाऊँगा।” बेटा बोला।
“ऐसा नही है बेटा, यदि हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें उसे यह कह कर टालना नहीं चाहिए कि अभी हमारे पास समय नहीं है। वास्तव में होता क्या है, जब हम किसी समस्या की अनदेखी करते हैं तो वह धीरे-धीरे और बड़ी होती जाती है और अंततः हमें जितनी हानि पहुँचा सकती थी उससे कहीं अधिक हानि पहुँचा देती है। तुम्हें कंकड़ निकालने में अधिक से अधिक एक मिनट का समय लगता पर अब उस एक मिनट के बदले तुम्हें एक सप्ताह तक पीढ़ा सहनी होगी।” पिताजी ने अपनी बात पूरी की।
मित्रों, हमारा जीवन तमाम ऐसे कंकडों से भरा हुआ है, कभी हम अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान होते हैं तो कभी हमारे रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है तो कभी हमें अपने साथ काम करने वाले सहकर्मी से समस्या होती है।
आरंभ में ये समस्याएँ छोटी प्रतीत होती हैं और हम इनके बारे में बात करने या इनका समाधान खोजने से बचते हैं, पर धीरे-धीरे इनका रूप बड़ा होता जाता है। जैसे कोई ऋण जिसे हम समय रहते एक हज़ार रुपये देकर चुका सकते थे उसके लिए बाद में 5000 रूपये चाहिए होते हैं… रिश्ते की जिस कड़वाहट को हम ‘खेद है’ कहकर दूर कर सकते थे वह अब टूटने की कगार पर आ जाता है और एक छोटी सी बातचीत से हम अपने सहकर्मी का भ्रम दूर कर सकते थे वह कुछ समय बाद कार्य-स्थल की राजनीति में परिवर्तित हो जाता है।
समस्याओं का समाधान समय रहते कर लेना चाहिए अन्यथा देरी करने पर वे उन कंकडों की तरह आपका भी खून बहा सकती हैं।

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जय श्री कृष्ण

"जय श्री कृष्ण "एक प्रसिद्ध नगर मे भगवान श्री कृष्ण का मंदिर था वही पास मे एक बहुत बडा बाजार भी था मंदिर मे भगवान को मक्खन मिश्री का ही भोग लगता था उसी बाजार मे एक जलेबी वाले ने दुकान खोली ओर सबसे पहले वो जलेबिया बनाकर भगवान को भोग लगाने के लिए ले गया मगर पुजारी ने ये कहकर मना कर दिया कि भगवान को सिर्फ मक्खन मिश्री का ही भोग लगाया जाता हे दुखी मन से जलेबी वाला बाहर आकर गरीबों मे सारी जलेबिया बांट देता हे भगवान श्री कृष्ण भी बालक रूप धारण करके जलेबी लेकर खाते हे उन्हें जलेबी बहुत अच्छी लगती हे शाम को मदिर के कपाट बंद हो जाने के बाद भगवान बालक रुप धारण करके बाजार मे जलेबी वाले के पास पहुंच जाते हे औऱ जलेबी मांगते हे जलेबी वाला पूछता हे कितने पैसों की दू तो बालक श्री कृष्ण कहते हे मेरे पास तो पैसे नही हे जलेबी वाला कहता है तो जलेबी नही मिलेगी इस पर बालक श्री कृष्ण अपने हाथ का कंगन जोकि सोने का होता हे कहकर कि जलेबी तो मे जरूर खाऊगा ये रख लो जलेबी वाला सोने के कंगन को देखकर बोला पर इस बदले कितनी जलेबी दू बालक श्री कृष्ण बोले ये थाली भर दे दो जलेबी वाले ने पूरा थाल भर कर जलेबी दे दी बालक श्री कृष्ण बोले मे ये जलेबी वहाँ बैठकर खालू जलेबी वाला बोला जाओ खालो इसके बाद जलेबी वाला जलेबी बानाने मे बिजी हो गया और बालक वहाँ से आलोप हो गया अगले दिन जब सुबह पुजारी मंदिर मे भगवान की पुजा के लिए आऐ तो देखा कि भगवान के हाथ का कंगन गायब हे मंदिर के सभी लोग भगवान के कंंगन को ढूढने मे लग गये कंगन तो मिला नही जलेबी वाले कि थाली मिल गई जिस पर उसका नाम लिखा था पुजारी अपने सभी साथियों सहित जलेबी वाले के पास पहुंचे ओर उससे पूछा कि तुमहारा थाल मंदिर मे कैसा आया जलेबी वाले ने उन्हें सारी बात बता दी औऱ वो कंगन भी दिखाया जो बालक बने श्री कृष्ण ने उन्हें दिया था पुजारी ने अपने दोनों हाथ ऊपर करके कहा भगवान मैंने आपकी इतनी सेवा की मगर आपके दर्शन नही हूऐ ओर आप ने इस जलेबी वाले को अपने बालक रूपी दर्शन करा दिऐ तभी वहाँ आकाश वाणी हुई भगवान बोले मे हे पुजारी ...मे तो सिर्फ श्रद्धा भाव का भूखा हू मे तो अपने भक्तों के बस मे हू तुम ने इस जलेबी वाले का मन ये कहकर दुखाया कि मे सिर्फ मकखन मिश्री खाता हूं जबकि मे तो अपने भक्त के प्यार का भूखा हूं..कहकर आवाज लुप्त हो गई मित्रों सचमुच प्रभु प्यार और भाव के भूखे होते है और हम सभी उन्हें दिखावे के जरिये रिझाने की कोशिश मे रहते है अपने प्रभु से मन से श्रद्धा भाव से प्रेम कीजिए उन्हें पाने का एक यही उपाय है
जय श्री कृष्ण

ॐ (OM) उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ :

ॐ (OM)  उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ :

ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।
ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।
ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
जानीए
ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

● *उच्चारण की विधि*

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

01)  *ॐ और थायराॅयडः*

ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

*02)  *ॐ और घबराहटः-*
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

*03) *..ॐ और तनावः-*
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

*04)  *ॐ और खून का प्रवाहः-*
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

*5)  ॐ और पाचनः-*

ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

*06)  ॐ लाए स्फूर्तिः-*
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

*07)  ॐ और थकान:-*
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

*08) .ॐ और नींदः-*
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

*09) .ॐ और फेफड़े:-*
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

*10)  ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*
ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

*11)  ॐ दूर करे तनावः-*
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे । साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है ।
अपना ख्याल रखिये, खुश रहें ।
Source -facebook

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