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Thursday, February 20, 2025

एक तांत्रिक की रचनाये

मैं यहाँ पर एक अघोरी द्वारा लिखी हुई तंत्र से संबंधित घटनाओं को आपके लिए लेकर आया हूँ। ये सभी घटनाएँ काफी रोचक हैं। आपको इनको पढ़कर बहुत आनंद आएगा। प्रस्तुत की जा रही घटनाएँ किसी अन्य वेबसाइट से कॉपी की गई हैं, और इनका श्रेय मूल लेखक को जाता है।

प्रस्तुत की जा रही घटनाएँ काल्पनिक हैं या नहीं, इसका निर्णय पाठक स्वयं कर सकते हैं।

धन्यवाद।


Wednesday, April 29, 2020

आखिरी शिकार


    इस कहानी के सभी पात्र और घटनाये काल्पनिक हैं, जिसका वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं है। यह कहानी अंतर्जाल से संकलित है, यदि इसके मूल लेखक को इस रचना को यह प्रकाशित करने पर कोई आपत्ति होगी तो इसे इस ब्लॉग से हटा दिए जायेगा।



टेलीफोन की घन्टी घनघना उठी।

राज ने हाथ बढाकर रिसीवर उठा लिया "हैलो " - वह माउथपीस में बोला

मिस्टर राज !" - लगभग फौरन उसे दूसरी ओर से एक सशंक ब्रिटिश स्वर सुनाई दिया

यस ?" - राज बोला।

"मैं लन्दन में आपका स्वागत करता हूं।" - दूसरी ओर से आवाज आई।

राज के कान खड़े हो गये कनर्ल मुखर्जी ने भारत में उसे जिस संभावित वार्तालाप के विषय में बताया था, वह उस वार्तालाप का प्रथम वाक्य था।

"धन्यवाद " - राज भावहीन स्वर से बोला - "लेकिन लन्दन में मेरा स्वागत करने के अतिरिक्त
और क्या कर सकते हो?"

"मैं बहुत कुछ कर सकता हूं, सर " –उत्तर मिला - "जैसे मैं आपको लन्दन का वह चेहरा दिखा सकता हूं जो बहुत कम लोगों ने बहुत कम बार देखा है।"

वार्तालाप ठीक उसी ढंग से चल रहा था जैसा
कर्नल मुखर्जी ने उसे संकेत दिया था

"बदले में मुझे क्या करना होगा ?" - राज ने पूछा उसका वह प्रश्न भी कोडवर्ड की तरह इस्तेमाल होने वाले उस वार्तालाप का एक अंश था



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